मुज़फ़्फ़रनगर में 11 दिन बाद रिहा हुए 'ग़लती से पकड़े गए' फ़ारूक़
मोदी ने कहा,"आज जो लोग भारत की संसद के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं, मैं उनसे कहना चाहता हूँ कि आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की हरकतों को बेनक़ाब किया जाना चाहिए." "अगर आपको आंदोलन करना है तो पिछले 70 साल में पाकिस्तान की हरकतों के ख़िलाफ़ नारे लगाइए. अगर आपको नारे लगाने ही हैं तो पा किस्तान में जिस तरह अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है, उस से जुड़े नारे लगाइए. अगर आपको जुलूस निकालना ही है तो पाकिस्तान से आए हिंदू-दलित-पीड़ित-शोषितों के समर्थन में जुलूस निकालिए." विरोध करने वालों का तर्क है कि ये क़ानून धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाला है जो संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ है. इस क़ानून में बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख) से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता मिल पाने का प्रा वधान किया गया है. इससे पहले 1955 के नाग रिकता क़ानून के तहत भारत में अवैध तरीक़े से दाख़िल होने वाले लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकती थी और उन्हें वापस उनके देश भे...