वेडिंग की जानकारी लीक, दुल्हन ने सखियों का कराया लाई डिटेक्टर टेस्ट
वेडिंग के लिए तय ड्रेसकोड की जुड़ी जानकारी ऑनलाइन लीक हो जाने से एक दुल्हन इतनी नाराज हो गई कि उसने अपनी सखियों का झूठ पकड़ने वाला टेस्ट कराने का फैसला किया. इसके बाद दुल्हन की एक करीबी दोस्त ने जानकारी लीक करने की बात स्वीकार कर ली. उसे घर से बाहर कर दिया गया. यह मामला हवाई में हुई एक शादी का है.
टेस्ट के दौरान दुल्हन की एक दोस्त ने स्वीकार कर लिया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट की थी. असल में दुल्हन ने अपनी शादी के दौरान लोगों के पहनने के लिए अजीब प्लानिंग की थी और सबके लिए ड्रेस कोड निर्धारित किया था. दुल्हन ने वजन के हिसाब से कपड़े पहनने को कहा था. इसके लिए उसने करीब 50 हजार रुपये खर्च करने की बात कही थी.
लेकिन जब वेडिंग की प्लानिंग ऑनलाइन लीक हो गई तो पोस्ट वायरल हो गया. बाद में कई लोगों ने लाई डिटेक्टर टेस्ट पर तंज कसते हुए पूछा कि पॉलिग्राफी पार्टी कैसी रही? दुल्हन ने जवाब दिया- 'फंटास्टिक. 100 फीसदी अटेंडेंस था. मैंने साधारण सवाल पूछे कि क्या तुमने ड्रेस कोड की जानकारी ऑनलाइन शेयर की? क्या तुम मुझसे नफरत करती हो?
दुल्हन ने इससे पहले लोगों से कहा था कि वे क्या पहनकर आ रहे हैं, इसकी जानकारी एक महीने पहले भेज दें. दुल्हन ने तय किया था कि जिन महिलाओं का वजन 45 किलो से 72 किलो है, उन्हें ग्रीन वेल्वेट जंपर पहनना होगा. वहीं, जो 72 किलो से अधिक की हैं, उन्हें काले कपड़े पहनने होंगे. इसी तरह पुरुषों के लिए भी ड्रेस कोड तय किया गया था.
बीजेपी के लिए भावनात्मक मुद्दा
गौरतलब है कि असम में NRC की मसौदा सूची जारी होने के बाद अवैध घुसपैठियों की समस्या से जूझ रहे पूर्वोत्तर के तमाम राज्यों द्वारा उनके राज्य में NRC लागू करने की मांग होने लगी थी. केंद्र की बीजेपी सरकार के इस कदम को जबरदस्त समर्थन हासिल हुआ. दरअसल बांग्लादेश से आए मुस्लिम घुसपैठियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बता कर बीजेपी इस मुद्दे को भावनात्मक रूप देती रही है. वहीं बीजेपी ने इन चुनावों में पड़ोसी देशों में उत्पीड़न का शिकार होकर भारत आने वाले हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने अपने घोषणापत्र में किया था. पूर्वोत्तर में लोकसभा की 25 सीटें आती हैं, जिसपर बीजेपी का खास फोकस है. दरअसल बीजेपी उत्तर और पश्चिम भारत में होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई इन सीटों से करना चाहती है. लेकिन बीजेपी के इस प्लान को धक्का लग सकता है क्योंकि नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे अधिकतर क्षेत्रीय दल अपने-अपने राज्यों में बीजेपी के साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं.
नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 क्या कहता है?
दरअसल, नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 के माध्यम से सरकार अवैध घुसपैठियों की परिभाषा फिर से गढ़ना चाहती है. इसके जरिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन कर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय के अवैध घुसपैठियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है. हालांकि इस विधेयक में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में उत्पीड़न का शिकार मुस्लिम अल्पसंख्यकों (शिया और अहमदिया) को नागरिकता देने का प्रावधान नहीं है. इसके आलावा इस विधेयक में 11 साल तक लगातार भारत में रहने की शर्त को कम करते हुए 6 साल करने का भी प्रावधान है.
नागरिकता अधिनियम, 1955 के मुताबिक वैध पासपोर्ट के बिना या फर्जी दस्तावेज के जरिए भारत में घुसने वाले लोग अवैध घुसपैठिए की श्रेणी में आते हैं.
पूर्वोत्तर में क्यों हो रहा है विरोध?
जहां नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता देने की बात करता है, NRC के मामले में ऐसा नहीं है. NRC के तहत 24, मार्च 1971 से भारत में अवैध रूप से रह रहे सभी धर्म के लोगों को चिंहित कर इन्हें वापस भेजने की बात है. इस लिहाज से यह नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016, NRC के सिद्धांत को उलट देता है, क्योंकि यह सभी गैर-मुस्लिमों को नागरिकता देने के उद्देश्य से लाया गया है. पूर्वोत्तर में एनडीए के सहयोगी इस विधेयक का विरोध इस लिए कर रहे हैं क्योंकि वे इसे अपनी सांस्कृतिक, सामाजिक और भाषाई पहचान के साथ खिलवाड़ समझते हैं. जिसके लिए ये दल निरंतर संघर्ष करते आए हैं.
इन दलों की दूसरी बड़ी चिंता यह भी है कि नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 लागू होने से NRC के तहत चिन्हित अवैध शरणार्थी या घुसपैठिओ संबंधी अपडेट कोई मायने नहीं रखेंगे. तीसरा बड़ा मुद्दा यहा है कि यह विधेयक धर्म के आधार पर नागरिकता प्रदान करने की बात करता है. जबकि NRC में एक निश्चित समय सीमा के बाद से भारत में अवैध तौर पर रह रहे सभी अवैध घुसपैठियों की पहचान कर वापस भेजने की बात है.
टेस्ट के दौरान दुल्हन की एक दोस्त ने स्वीकार कर लिया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट की थी. असल में दुल्हन ने अपनी शादी के दौरान लोगों के पहनने के लिए अजीब प्लानिंग की थी और सबके लिए ड्रेस कोड निर्धारित किया था. दुल्हन ने वजन के हिसाब से कपड़े पहनने को कहा था. इसके लिए उसने करीब 50 हजार रुपये खर्च करने की बात कही थी.
लेकिन जब वेडिंग की प्लानिंग ऑनलाइन लीक हो गई तो पोस्ट वायरल हो गया. बाद में कई लोगों ने लाई डिटेक्टर टेस्ट पर तंज कसते हुए पूछा कि पॉलिग्राफी पार्टी कैसी रही? दुल्हन ने जवाब दिया- 'फंटास्टिक. 100 फीसदी अटेंडेंस था. मैंने साधारण सवाल पूछे कि क्या तुमने ड्रेस कोड की जानकारी ऑनलाइन शेयर की? क्या तुम मुझसे नफरत करती हो?
दुल्हन ने इससे पहले लोगों से कहा था कि वे क्या पहनकर आ रहे हैं, इसकी जानकारी एक महीने पहले भेज दें. दुल्हन ने तय किया था कि जिन महिलाओं का वजन 45 किलो से 72 किलो है, उन्हें ग्रीन वेल्वेट जंपर पहनना होगा. वहीं, जो 72 किलो से अधिक की हैं, उन्हें काले कपड़े पहनने होंगे. इसी तरह पुरुषों के लिए भी ड्रेस कोड तय किया गया था.
बीजेपी के लिए भावनात्मक मुद्दा
गौरतलब है कि असम में NRC की मसौदा सूची जारी होने के बाद अवैध घुसपैठियों की समस्या से जूझ रहे पूर्वोत्तर के तमाम राज्यों द्वारा उनके राज्य में NRC लागू करने की मांग होने लगी थी. केंद्र की बीजेपी सरकार के इस कदम को जबरदस्त समर्थन हासिल हुआ. दरअसल बांग्लादेश से आए मुस्लिम घुसपैठियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बता कर बीजेपी इस मुद्दे को भावनात्मक रूप देती रही है. वहीं बीजेपी ने इन चुनावों में पड़ोसी देशों में उत्पीड़न का शिकार होकर भारत आने वाले हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने अपने घोषणापत्र में किया था. पूर्वोत्तर में लोकसभा की 25 सीटें आती हैं, जिसपर बीजेपी का खास फोकस है. दरअसल बीजेपी उत्तर और पश्चिम भारत में होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई इन सीटों से करना चाहती है. लेकिन बीजेपी के इस प्लान को धक्का लग सकता है क्योंकि नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे अधिकतर क्षेत्रीय दल अपने-अपने राज्यों में बीजेपी के साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं.
नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 क्या कहता है?
दरअसल, नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 के माध्यम से सरकार अवैध घुसपैठियों की परिभाषा फिर से गढ़ना चाहती है. इसके जरिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन कर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय के अवैध घुसपैठियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है. हालांकि इस विधेयक में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में उत्पीड़न का शिकार मुस्लिम अल्पसंख्यकों (शिया और अहमदिया) को नागरिकता देने का प्रावधान नहीं है. इसके आलावा इस विधेयक में 11 साल तक लगातार भारत में रहने की शर्त को कम करते हुए 6 साल करने का भी प्रावधान है.
नागरिकता अधिनियम, 1955 के मुताबिक वैध पासपोर्ट के बिना या फर्जी दस्तावेज के जरिए भारत में घुसने वाले लोग अवैध घुसपैठिए की श्रेणी में आते हैं.
पूर्वोत्तर में क्यों हो रहा है विरोध?
जहां नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता देने की बात करता है, NRC के मामले में ऐसा नहीं है. NRC के तहत 24, मार्च 1971 से भारत में अवैध रूप से रह रहे सभी धर्म के लोगों को चिंहित कर इन्हें वापस भेजने की बात है. इस लिहाज से यह नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016, NRC के सिद्धांत को उलट देता है, क्योंकि यह सभी गैर-मुस्लिमों को नागरिकता देने के उद्देश्य से लाया गया है. पूर्वोत्तर में एनडीए के सहयोगी इस विधेयक का विरोध इस लिए कर रहे हैं क्योंकि वे इसे अपनी सांस्कृतिक, सामाजिक और भाषाई पहचान के साथ खिलवाड़ समझते हैं. जिसके लिए ये दल निरंतर संघर्ष करते आए हैं.
इन दलों की दूसरी बड़ी चिंता यह भी है कि नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 लागू होने से NRC के तहत चिन्हित अवैध शरणार्थी या घुसपैठिओ संबंधी अपडेट कोई मायने नहीं रखेंगे. तीसरा बड़ा मुद्दा यहा है कि यह विधेयक धर्म के आधार पर नागरिकता प्रदान करने की बात करता है. जबकि NRC में एक निश्चित समय सीमा के बाद से भारत में अवैध तौर पर रह रहे सभी अवैध घुसपैठियों की पहचान कर वापस भेजने की बात है.
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